एकल नारी शक्ति संगठन ने राज्य सरकार से नीति बनाने की मांग की

जया शर्मा.देवलोक न्यूज.शिमला

सरकार यूं तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को खूब तब्बजो दे रही हैं। लेकिन यहां एकल महिलाएं कई प्रकार की परेशानियों की उलझन हैं। पिछले कई सालों से एकल महिलाओं की मांगों पर सरकार कोई गौर नहीं कर रही हैं। शिमला में आयोजित एकल महिला विकास एवं किसान कल्याण समिति की मीटिंग में एकल महिलाओं ने सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। एकल महिलाओं ने सरकार से लीज पर जमीन देने की मांग भी है जिससे वे खेती-बाड़ी और अपना व्यवसाय करके अपना भरण-पोषण कर सके। सरकारी योजनाओं में लाभ के लिए आय सीमा 35 हज़ार से बढ़ाकर 60 हज़ार करने की मांग रखी है।

 

एकल नारी शक्ति संगठन की स्टेट कोऑर्डिनेटर निर्मल चन्देल ने बताया कि मीटिंग में प्रदेशभर की करीब 80 एकल महिलाओं ने भाग लिया और ग्राउंड लेवल पर आने वाली समस्याओं के बारे में चर्चा की गई। वहीं महिलाओं को जो समस्या आ रही है उसे सरकार के संबंधित विभागों को मांगपत्र के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया है ताकि एकल महिलाओं की समस्याओं का समाधान हो सके।

उन्होंने कहा कि कई पंचायतों में महिलाओं को पति के बाद जमीन उनके नाम ना होने की वजह से भारी परेशानी उठानी पड़ रही है जिसके लिए राजस्व विभाग से पति के साथ- साथ महिला के नाम पर भी जमीन होने की मांग की गई है जिससे महिला सरकार की योजनाओं का फायदा उठा सकें।

उन्होंने मांग की है कि राजस्थान, उत्तराखंड ,झारखंड की तर्ज पर राज्य सरकार परित्यक्ता महिलाओं को पररिभाषित करें और उनके लिए नीति बनाए। विवाह के बाद एकल हुई महिलाओं का राशनकार्ड जो ससुराल में बना है उसे खारिज करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की हो।

उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के मां बाप मानसिक व शारीरिक तौर पर विकलांग है उनको भी मदर टैरेसा असहाय संबल योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि अपनी सामूहिक आजीविका कमाने के लिए एकल नारी शक्ति संगठन को सरकार द्वारा लीज पर 50 बीघे जमीन उपलब्ध करवाई जाए। मनरेगा में महिलाओं को 200 दिन का रोजगार दिया जाए। एकल महिलाओं के लिए राज्य सरकार के बजट में अलग मद बनाया जाये।

गौर रहे कि प्रदेश में लगभग 16249 एकल महिलाएं हैं जो अकेले जीवन यापन कर रही हैं । वहीं इन महिलाओं में से किसी के पति ने छोड़ दिया है, कुछ महिलाओं के  पति की मृत्यु होने पर ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया। वहीं इन महिलाओं को न ससुराल में आसरा मिल रहा है ना ही मायके वाले इनको अपना रहे है। ससुराल और मायके से सताई यह महिलाएं कई सालों से अपने हक़ की लड़ाई लड़ रही हैं। एकल महिलाओं ने सरकार से मांगे पूरी न होने पर पदयात्रा शुरू करने की बात भी कही है। इस मौके पर मेहंदी शर्मा जिला समन्वयक सिरमौर, अर्चना नाग जिला स्तर सदस्य कांगड़ा,नीलम जिला समन्वयक चंबा, रतनी देवी और रेणु राज्य स्तर सदस्य बिलासपुर,निशा ठाकुर जिला समन्वयक शिमला उपस्थित रही।

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