महिलाओं के लिए बनाए गए कानूनों का पालन कड़ाई से हो: डेजी ठाकुर

जया शर्मा .देवलोक न्यूज.शिमला 

महिलाएं अपने स्वास्थ्य और पोषण को प्राथमिकता करें, ताकि स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण में उनका सहयोग और भूमिका अधिक प्रबल हो सके। यह विचार आज राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा ने महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण और शारीरिक विकास विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये। यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में न्यायिक अकादमी घंडल के सभागार में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि महावारी प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जिसके संबंध में समाज को पुरानी कुरितियों को त्याग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार की समृद्धि व खुशहाली महिलाओं पर निर्भर करती है, जिसके लिए परिवार व समाज के प्रत्येक नागरिक को जागरूक और सजग होना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के मानसिक स्वस्थता के प्रति भी विशेष ध्यान देने की अपील की।  उन्होंने कहा कि महिला तभी एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है, यदि वह शारीरिक व मानसिक तौर पर पूर्णतया स्वस्थ हो। महिलाओं को मानसिक प्रताड़ना से बचने के लिए विभिन्न स्तरों व संस्थाओं के अंतर्गत मानसिक परामर्शदाताओं का होना आवश्यक है। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न शैक्षणिक व अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों से इस संबंध में कार्य करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि केंद्रीय सरकार द्वारा महिलाओं के स्वास्थ्य तथा सम्मान के लिए अनेक योजनाएं आरंभ की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी योजनाओं का लाभ महिलाओं को मिल सके, इसके लिए हमें सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के दौरान चर्चा किये गये विषयों को हम अपने क्षेत्रों में भी संप्रेषित करें, तभी कार्यशाला की सार्थकता सिद्ध होगी।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डेजी ठाकुर ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के सम्मान, संरक्षण, स्वास्थ्य व सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि  महिलाओं  के लिए बनाए गए कानूनों का पालन कड़ाई से हो, ये हम सभी को सुनिश्चित करना है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग निशा सिंह ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं तथा विभाग द्वारा इस संबंध में किए जा रहे कार्यों व प्रयासों के संबंध में जानकारी दी।

 

प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता आईपीएस कमाडेंट फस्र्ट बटालियन जुन्गा अंजुम आरा तथा डाॅ. सुषमा रेवाल ने की, जिसमें सांध्य महाविद्यालय शिमला की प्रधानाचार्य मीनाक्षी फेथपाल ने महिला सशक्तिकरण में महिलाओं के मानसिक व भावनात्मक स्थिति पर विचार प्रकट किए। द्वितीय तकनीकी सत्र में डाॅ. अंजलि चौहान ने माहवारी के दौरान स्वच्छता, वर्तमान परिदृश्य, प्रभाव और चुनौतियों तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा इस संबंध में सामाजिक वर्जनाओं के प्रति जागरूकता प्रदान किए जा रहे कार्यों पर विचार रखे, जिसकी अध्यक्षता मैडिकल सुप्रिन्टेंडेंट डाॅ. बीषण धीमान ने की। सहायक निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग डाॅ. सीमा ठाकुर ने तृतीय तकनीकी सत्र में महिलाओं के स्वास्थ्य में पोषण के महत्व पर जानकारी दी।

इस अवसर पर गुजरात राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा ललिना बेन, झारखंड महिला आयोग की अध्यक्षा कल्याणी शरण, हरियाणा राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्षा प्रीति भारद्वाज, सदस्य रेणु भाटिया तथा सदस्य झारखंड महिला आयोग शर्मिला सोरन, उप निदेशक पंजाब महिला आयोग विजय कुमार, सदस्य राज्य महिला आयोग मंजरी नेगी इंदू बाला, निदेशक न्यायिक अकादमी घंडल वीरेंद्र शर्मा, निदेशक महिला एवं बाल विकास राजेश शर्मा भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का सफल संचालन सदस्य सचिव राज्य महिला आयोग एवं संयुक्त निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग डाॅ. भावना ने किया। कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य, छात्र व स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भाग लिया।

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