श्राद्ध पक्ष 13 सितंबर से 28 सितंबर तक

इस बार श्राद्ध का एक दिन कम होगा

जया शर्मा .देवलोक न्यूज .शिमला

प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को श्राद्ध कर्म किया जा सकता है लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध कर्म करने का विधान है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के इस पर्व को श्राद्ध कहा जाता है। इस बार पितृ पक्ष 13 से 28 सितंबर तक चलेगा, जिसमें श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।

13 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध 

मदन  गुप्ता सपाटू,ज्योतिर्विद् के अनुसार इस वर्ष श्राद्ध का एक दिन कम होगा, क्योंकि दो श्राद्ध एकादशी के दिन पड़ेंगे। शारदीय नवरात्र पूरे नौ दिन पड़ रहे हैं। ज्योतिष के दृष्टि से श्राद्ध का घटना और नवरात्र का बढ़ना या पूरा पड़ना शुभ मनाया गया है।

16 दिनों के श्राद्ध और नौ दिनों के नवरात्र एक के बाद एक पड़ते हैं। इस तरह 25 दिनों का विशेष पर्व काल मनाया जाता है।  इस वर्ष 16 दिनों के श्राद्ध 13सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से प्रारंभ हो

जाएंगे। महालय श्राद्ध पक्ष का यह पहला दिन होगा।

 श्राद्धों का समापन पितृ अमावस्या और पितृ विसर्जन के श्राद्ध के साथ 28 सितंबर को होगा।

 श्राद्ध के दिन यद्यपि 16 रहेंगे, लेकिन 27 सितंबर को चतुर्दशीतिथि का लोप हो जाएगा।

 चतुर्दशी श्राद्ध 27 सितंबर शुक्रवार को होगा, जबकि त्रयोदशी श्राद्ध 26 सितंबर गुरुवार को पड़ रहा है।

इससे एक दिन पूर्व 25 सितंबर को एकादशी और द्वादशी के दो श्राद्ध एक साथ पड़ जाएंगे।

 शारदीय नवरात्र 29 सितंबर को प्रारंभ होंगे और महानवमी के दिन

सरस्वती और दुर्गा विसर्जन के साथ सात अक्टूबर को संपन्न होंगे।

शारदीय नवरात्र घट स्थापन 29 सितंबर को प्रातकाल होगा। अष्टमी तिथि छह अक्टूबर को पड़ेगी। दुर्गा नवमी के अगले दिन आठ अक्टूबर को विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा।

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