उद्योग में मंदी के कारण तालाबंदी से लगभग 10 हज़ार मजदूरों की नौकरी चली गयी: विजेंद्र मेहरा

देवलोक न्यूज.शिमला
13 से 15 सितंबर तक चलने वाले 13वें सीटू राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन की कार्यवाही  कालीबाड़ी में जारी रही। दूसरे दिन सम्मेलन में दलितों, आदिवासियों  व अल्पसंख्यकों पर हमलों के खिलाफ,नई पेंशन नीति को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने,श्रम कानूनों में बदलाव के खिलाफ,न्यूनतम वेतन 18 हज़ार रुपये करने,आउटसोर्सिंग,ठेकाकरण व पार्टटाइम नीति पर रोक लगाने व स्थायी रोजगार तथा आंगनबाड़ी,मिड डे मील व आशा आदि स्कीम वर्करज़ को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने पर छः प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन में महासचिव द्वारा रखी गयी रिपोर्ट पर 37 प्रतिनिधियों ने करीब छः घण्टे तक लम्बी चर्चा की।
 दूसरे दिन के दूसरे सत्र में सीटू राज्य कमेटी द्वारा एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें सीटू अखिल भारतीय महासचिव कॉमरेड तपन सेन,डॉ कश्मीर ठाकुर,जगत राम,प्रेम गौतम व विजेंद्र मेहरा मौजूद रहे। प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए तपन सेन ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देशी व विदेशी पूंजीपतियों के गठजोड़ से मिलीभगत करके न केवल मजदूरों का गला घोंट रही है बल्कि देश की संप्रभुता को भी गिरवी रख रही है। देश में बढ़ रही आर्थिक मंदी से मजदूरों पर भारी हमला हो रहा है। इस मंदी के कारण ऑटोमोबाइल उद्योग में लगभग 10 लाख मजदूरों की छंटनी का खतरा मंडरा रहा है। पारले जी बिस्कुट जैसे उद्योग में मंदी के कारण तालाबंदी से लगभग 10 हज़ार मजदूरों की नौकरी चली गयी है। एक तरफ लाखों मजदूरों की रोजगार से छंटनी हो रही है और दूसरी ओर उद्योगों में कई-कई दिनों का शटडाउन किया जा रहा है व मजदूरों के कई कार्य दिवस खत्म किये जा रहे हैं व उन्हें अर्ध बेरोजगारों की स्थिति में पहुंचाया जा रहा है। मोदी सरकार चन्द पूंजीपतियों के एकाधिकार को स्थापित करने के लिए गरीब जनता व मजदूरों पर हमला कर रही है।
उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग पर बढ़ते हमलों व श्रम कानूनों में बदलाव के खिलाफ 30 सितंबर को देश के हज़ारों मजदूर ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर दिल्ली में संसद मार्ग पर खुला अधिवेशन करेंगे व भविष्य के आंदोलन का ऐलान करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

1 × four =