कमरुनाग में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

जया शर्मा.देवलोक न्यूज.मंडी
मंडी जिला के बड़ा देओ कमरूनाग का  प्रसिद्ध मेला ज्येष्ठ शनिवार आषाढ़ संक्राति के दिन बड़ी श्रद्धा व उत्साह  के साथ मनाया गया। इसी के साथ ही दो दिवसीय मेला संपन हो गया। इस मेले में स्थानीय लोगों के साथ बाहरी राज्यों से हजारों संख्या में श्रद्धालु दुर्गम रास्ता होने के बाबजूद  कमरुनाग के दर्शनों के लिए पहुंचे।
कमरूनाग मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंज उठा। देवता के लाठी कारदारों ने देव पूजा के लिए सुबह से ही तैयारियां कर ली थी। वहीं जैसे  ही देव पूजा का समय आया तो कमरुनाग देवता के गुर नीलमणि, कटवाल सहित अन्य कारदारों ने काहूलियों की ध्वनि के साथ मूर्ति पूजन के बाद देव झील यानि सर की विशेष पूजा अर्चना की।
इसके बाद देव कमेटी की ओर से सदियों से चली आ रही रीति रिवाज के आधार पर झील में सोना चांदी और जेवरों को चढाया गया। वहीं  नाग देवता के प्रति आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं ने कमरुनाग के दरबार पर बकरे पहुंचाए और देवता को चढ़ाए। लेकिन किसी भी प्रकार की कोई पशु बलि यहां पर नहीं दी गई। यहां पर लोगों ने अपने बच्चों के मुंडन संस्कार करवाए तो नारियल की बलि दी।कमरुनाग मंदिर के गूर नीलमणि ने खेल के वक्त लोगों के प्रश्नों के जबाव दिए।  श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रण करने के लिए पुलिस के जवानों ने मोर्चा संभाला था। जिससे मंदिर पहुंचने वाले लोगों को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना आए। वहीं पुलिस के जवानों ने पूरी तरह से व्यवस्था को संभाला।
बाहरी अन्य राज्यों के  पर्यटक भी बड़ा देव कमरूनाग पहुंचे।  देव कमरूनाग मेले में जीऊणी खडड, तहसील निहरी के पंडारचौकी,पौड़ाकोठीकमांद,कटेरु,जयदेवी,करसोग के स्थानीय लोग भी इस मेले में पहुंचे। मंदिर के लिए दुर्गम रास्ता होने के बाबजूद भी श्रद्धालु पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर इस मंदिर पहुंचे।वहीं रोहांडा, जाच्छ, धंग्यारा, मंडोगलू, शाला और करसोग घाटी के रास्ते देवता के भक्तों के जयकारों से गूंजते रहे। लोगों की मन्नत पूरी होने पर बड़ा देव कमरुनाग की झील में सोना, चांदी, आभूषण और नोट को चढ़ाया गया, तो  बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालु इस अनुठी परम्परा से चकित हो गए।
मेला कमेटी ने इस सफल आयोजन के लिए प्रशासन का धन्याबाद किया। इस मौके पर मेला कमेटी के और कांढी-कमरूनाग पंचायत के प्रधान मान सिंह , रनजीत सिंह, बाग सिंह सहित कमेटी के अन्य सभी सदस्यों ने अपना सहयोग दिया।वहीं दो दिवसीय इस मेले में लगभग पचास हजार श्रद्धालुओं ने कमरुनाग के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस झील की परिक्रमा की। अपनी मन्नतों के पूरी होने पर कमरुनाग के आगे शीश नवाया। स्थानीय कारोबारियों सहित बाहर से आए कारोबारियों ने अपने जलेबी सहित अन्य खाने पीने के स्टॉल लगाए थे। जिसमें लोगों ने जमकर खरीददारी की। श्रद्धालुओं ने यहां की वादियों का खूब आनंद लिया। यह मंदिर घने देवदार के जंगल के बीच हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

8 − 5 =