मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही मजदूरों पर हमले तेज कर दिए

देवलोक न्यूज.शिमला
सीटू का तेरहवां हिमाचल प्रदेश राज्य सम्मेलन शिमला के कालीबाड़ी में शुरू हुआ। इस से पूर्व पंचायत भवन से सब्जी मंडी ग्राउंड तक एक जबरदस्त रैली का आयोजन किया गया। सब्जी मंडी ग्राउंड में हुई जनसभा को सीटू राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन,सीटू राष्ट्रीय सचिव कश्मीर ठाकुर,हिमाचल किसान सभा महासचिव राकेश सिंघा,सीटू राज्याध्यक्ष जगत राम,महासचिव प्रेम गौतम,उपाध्यक्ष राजकुमारी व राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा ने सम्बोधित किया। इसके बाद सम्मेलन का उद्घाटन कालीबाड़ी हॉल में कॉमरेड तपन सेन ने किया।
इसके बाद सम्मेलन को एटक नेता अतुल भारद्वाज,हिमाचल किसान सभा अध्यक्ष डॉ कुलदीप तनवर,ऑल इंडिया लॉयर्ज़ यूनियन एडवोकेट ओ पी चौहान,अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति फालमा चौहान,बीमा कर्मचारियों के संगठन एन जेड आई ई ए के मंडल सचिव प्रदीप मिनहास,एसएफआई राज्य सचिव अमित ठाकुर,डीवाईएफआई राज्य सचिव चन्द्रकान्त वर्मा,दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य सह संयोजक आशीष कुमार,पोस्टल कर्मचारी संगठन के राज्य महासचिव प्रेम प्रकाश मेहता व जन विज्ञान आंदोलन के नेता सुरेश पुंडीर ने सम्मेलन में मजदूरों को शुभकामना संदेश दिए। सम्मेलन में एडवोकेट रजनीश मनिकटाला, एडवोकेट विश्व भूषण,खुशी वर्मा व एडवोकेट जीता सिंह नेगी भी मौजूद रहे।
 सीटू राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन ने कहा कि  मोदी-2 सरकार ने सत्ता में आते ही मजदूरों पर हमले तेज कर दिए हैं। मोदी सरकार ने घोषणा की है कि वह 44 श्रम कानूनों को खत्म करके केवल 4 श्रम संहिताओं को अमल में लाएगी। 17 श्रम कानूनों को खत्म करके  दो श्रम संहिताओं में तब्दील करने का निर्णय ले लिया गया है। इस से मजदूरों के अधिकारों का दमन होगा व पूंजीपतियों को भारी फायदा होगा। इसके अलावा मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में ईपीएफ की 15 प्रतिशत राशि को शेयर मार्केट के हवाले करके पूंजीपतियों को पहले ही भारी फायदा पहुंचाया गया है। इसी सरकार ने ईएसआई की 75 हज़ार करोड़ राशि को अम्बानी के हवाले कर दिया है। इस तरह मोदी के दोनों कार्यकालों में पूंजीपतियों को भारी फायदा पहुंचाया गया है।
उन्होंने  कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में होने के कारण आगामी समय मजदूरों के लिए चुनौतियों भरा है। मोदी सरकार आंगनबाड़ी,मिड डे मील,आशा सहित लगभग 70 सामाजिक स्कीमों को खत्म करने की साज़िश रच रही है। यह सरकार 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार इन कर्मियों को मजदूर का दर्जा देने से भी मुकर रही है। खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाकर इस सरकार ने देश भर में काम कर रहे 2 करोड़ रेहड़ी,फड़ी व तयबजारी पर भी हमला बोल दिया है। यह सरकार बीमा,बैंक,बीएसएनएल आदि सार्वजनिक उपक्रमों को खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने सभी मजदूरों से आह्वान किया कि पूरे देश में ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा 44 श्रम कानूनों को खत्म करने की साज़िश के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष तेज करें।

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