राष्ट्रीय शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत की नींव स्थापित करने में निभाएगी महत्वपूर्ण भूमिकाः शिक्षा मंत्री

जया शर्मा.शिमला

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ गुणात्मक शिक्षा को भी प्राथमिकता प्रदान कर रही है। प्रदेश में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए टास्क फोर्स विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। प्रदेश में अन्य राज्यों की अपेक्षा उच्च शिक्षा क्षेत्र में ग्राॅस एनरोलमेंट रेशो काफी बेहतर है और प्रदेश सरकार 2035 तक 50 प्रतिशत ग्राॅस एनरोलमेंट रेशो के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में व्यवसायिक शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना है। वर्तमान में प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों को व्यवसायिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। प्रदेश सरकार छठी कक्षा से व्यवसायिक पाठयक्रम शुरू करने के लिए प्रयासरत है।
गोविन्द सिंह ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की ओर कदम बढ़ाते हुए अगले सत्र से महाविद्यालय में कौशल विकास केन्द्र स्थापित करने के प्रयास किए जाएगे, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में कौशल निर्माण करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के लिए योजना तैयार करे। नई शिक्षा नीति में सभी महाविद्यालयों को आॅटोनाॅमस महाविद्यालय के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस विषय में चरणबद्ध कार्य योजना तैयार की जाए।
शिक्षा सचिव राजीव शर्मा, निदेशक उच्चतर शिक्षा डाॅ. अमरजीत शर्मा, यू.जी.सी. सदस्य डाॅ. नागेश ठाकुर, हिमाचल प्रदेश उच्चतर शिक्षा काउंसिल अध्यक्ष प्रो. सुनील गुप्ता, समग्र शिक्षा अभियान राज्य परियोजना निदेशक वीरेन्द्र शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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