3 अगस्त को रक्षा बंधन,9 बजकर 29 मिनट के बाद बांधे राखी

 

देवलोक न्यूज.शिमला

रक्षा बधंन का त्योहार 3 अगस्त को हैं। इस दिन भद्रा , प्रातः 9 बजकर 29 मिनट तक है ,अतः इसके बाद ही रक्षा बंधन का शुभ समय आरंभ होगा। इसके बाद संपूर्ण समय भद्रा रहित और शुभ रहेगा।

यह रहेगा शुभ महूर्त

राखी बांधने का मुहूर्त : 09:30:30 से 21:11:21 तक

रक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त : 13:45:16 से 16:23:16 तक

रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त : 19:01:15 से 21:11:21 तक

सावन के व्रत का उद्यापन प्रातः 9 बज कर 30 मिनट के बाद

मदन गुप्ता सपाटू के अनुसार सावन मास का पहला सोमवार 6 जुलाई को था. 6 जुलाई से ही सावन मास का आरंभ हुआ था. सावन मास की समाप्ति 3 अगस्त सोमवार के दिन ही है।3 अगस्त को सावन के अंतिम सोमवार को विशेष पूजा का विधान है। इस दिन स्नान के बाद गंगाजल से पूजा स्थान को शुद्ध करें। इसके बाद पूजा आरंभ करें और व्रत का संकल्प लें। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक करें, दान दें. इस दिन क्रोध और हर प्रकार की बुराइयों से बचना चाहिए.

शुभ मुहूर्त
3 अगस्त को पूर्णिमा की तिथि है. . प्रातः 9 बज कर 30 मिनट के बाद ही  उद्यापन करें।किसी भी व्रत का समय पूरा होने के बाद प्रभु स्मरण के साथ जो अंतिम पूजा की जाती है, वही उस व्रत का उद्यापन कहलाता है। सावन का महीना समाप्ति की ओर है, ऐसे में सावन के व्रत करनेवाले भक्त और सावन सोमवार के व्रत करनेवाले भक्त अब व्रत के उद्यापन की तैयारी करना शुरू कर सकते हैं।

यदि आप अपने व्रत का उद्यापन पुरोहित  से न कराकर खुद करना चाहते हैं तो सुबह के समय दैनिक कार्यों से निवृत्त हो जाएं। गणपति की आरती के साथ पूजा शुरू करें। हवन करें, इसमें काले तिल का प्रयोग करें। आप महामृत्युंज मंत्र 1,2,5 या 7 मालाओं का जप अपनी श्रद्धानुसार कर सकते हैं। पूजा के बाद किसी जरूरतमंद को वस्त्रों या दक्षिणा का दान दें।पूजा के बाद ही कुछ खाएं

अगर आपने पूरे महीने सावन का व्रत किया है या केवल फलाहार लिया है तो आप भी 3 अगस्त को व्रत का उद्यापन कर सकते हैं। आपको पूजा और हवन के बाद ही कुछ खाना है।

उद्यापन वाले दिन स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहनना उचित होता है। इन्हीं वस्त्रों में पूजा करानी चाहिए

पूजा के लिए एक चौकी तैयार करें। इसे केले के पत्तों और फूलों से सुंदर तरीके से सजाएं। स्वयं या पुरोहित जी द्वारा इस चौकी पर भगवान भोलेनाथ, माता पार्वती, गणपति, कार्तिकेय,नंदी और चंद्रदेव की प्रतिमा स्थापित करें। इन्हें गंगाजल से स्नान कराने के बाद चंदन, रोली और अक्षत का टीका लगाएं।

फूल-माला अर्पित करें और पंचामृत का भोग लगाएं। भोलेनाथ को सफेद फूल अतिप्रिय हैं। सफेद मिठाई अर्पित करें। शिव मंदिर में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी,गंगाजल का पंचामृत अर्पित करें। बिल्व पत्र, धतूरा और भांग चढ़ाएं।

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