कोरोना काल में हरी चाय से कैसे बढ़ाएं प्राण शक्ति या इम्युनिटी : मदन गुप्ता सपाटू

जया शर्मा.शिमला
चीन में जब चाय की अचानक खोज हुई , उस समय किस ने सोचा होगा कि कभी ये जंगली पत्तियां जिसे पशु चर कर  एक्टिव हो जाते थे, एक दिन यह कैंसर से बचने, कोरोना से लड़ने और चिर यौवन प्राप्ति में सहायक होगी।ग्रीन टी का उपयोग दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। लेकिन यदि आप इसका प्रयोग ऐसे करें, तो आज की कोरोना परिस्थिति में यह एक अमृत सिद्ध होगी।
सामग्री
अच्छी ग्रीन टी, श्यामा ओैर रामा की तुलसी की 15 पत्तियां, अदरख, नींबू,शहद या शुगर फ्री टेबलेट, शक्कर ,बारीक मेथी दाने, गिलोय की डंडियां, अश्व गंधा, पत्थर चटटान  की पत्तियां या इनका चूर्ण , नीम की ताजी पत्तियां, अर्जुन छाल का पाउडर ,दालचीनी , लौंग, काली मिर्च, हमदर्द का  सुलेमानी नमक तथा पुदीने की तीन ताजी पत्तियां।
इनमें से कई औषधीय पौधे आप अपने किचन गार्डन या गमलों में भी लगा सकते हैं। कुछ सामग्री आपको बाजार में मिल जाएगी। यदि इनमें से सारी सामग्री न भी मिले तो चिंता न करें। फिलहाल जो भी मिले , उससे शुरुआत कर लें।
उपरोक्त सामग्री अपने सदस्यों की संख्यानुसार व अंदाजे से कम या अधिक लें ।
विधि
 अपनी आवश्यकता व सदस्यों की संख्यानुसार ,एक रात पहले एक चम्मच मेथी दाने ,गिलोय की डंडियां, अश्व गंधा, पत्थर चटटान  की पत्तियां या इनका चूर्ण , नीम की ताजी पत्तियां, अर्जुन छाल का पाउडर ,दालचीनी , लौंग, काली मिर्च, अदरख , पानी में भिगो दें। 
सुबह मिक्सी में इन्हें पीस लें और एक पतीले या पैन में पानी डाल कर 15 मिनट उबलने दें । जब पानी पौना रह जाए तो गैस बंद करके इसमें ग्रीन टी डाल कर ढक्कन लगा दें और 5 मिनट प्रतीक्षा करें।
कप में एक ताजा नींबू निचोड़ें, एक चम्मच शहद या शुगर फ्री टेबलेट या ब्राउन शक्कर डालें  और चुटकी भर सुलेमानी नमक स्वादानुसार तथा पुदीने की तीन ताजी पत्तियां  डालकर चाय छान लें। चम्मच से चाय हिला कर मार्निंग टी से रहिए पूरा दिन चुस्त-फुर्त।
 
ज्योतिषाचार्य मदन गुप्ता सपाटू के अनुसार इसे काढ़ा या दवाई समझने की बजाए चाय में अपनी पसंद के अनुसार सामग्री घटा या बढ़ा सकते हैं गर्मियों में इसे आप बर्फ डालकर कोल्ड टी के तौर पर दिन में कई बार पी सकते हैं।
कैसे करती है यह चाय अपना काम
मेथी  आपका रक्तचाप और शुगर लेवल नियंत्रित करती है। अदरख शरीर को सरदी में उर्जा प्रदान करती है। नींबू विटामिन सी की पूर्ति के अलावा फैट्स कम करता है। शहद पेट साफ करता है और नेत्र ज्योति ठीक रखता है। पत्थर चटटान व सुलेमानी नमक के नियमित प्रयोग से गॉल ब्लैडर या किडनी में कभी पत्थरी नहीं बनती। पुदीना खुश्बू प्रदान करने के अलावा  हाजमा दुरुस्त रखता है, अपच नहीं होने देता । गिलोय, अर्जुन छाल ,अश्वगंधा, दालचीनी, काली मिर्च आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
 गर्मियों में आप इसमें बर्फ डालकर कोल्ड टी का लुत्फ उठा सकते हैं।
हरी चाय हृदय रोग की संभावना कम करती है,कोलेस्ट्र्ोल  घटा के वज़न कम करती है। यह एंटी  आक्ॅसीडेंट,एंटी एजिंग ए रिफरेशिंग,कैंसर से लड़ने की क्षमता प्रदान करने वाली है। इसके नियमित सेवन से पेट का हाजमा ठीक रहता है,चेहरे पर झुर्रियां जल्दी नहीं आती।आप का यौवन बना रहता है। कई रोग दूर रहते हैं। इम्युनिटी सिस्टम अच्छा  हो जाता है। कई बीमारियों के प्रति शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। मस्तिष्क उत्तकों को मृत होने से रोका जा सकता है।
यही नहीं त्वचा के लिए इसी चाय में यदि आप एलोवेरा मिला कर इसकी आइस क्यूब्ज़ बना कर रख लें और चेहरे पर रोज लगाएं, आपकी स्किन, झुर्रियां रहित एवं कांतिमय रहेगी।ज्योतिषचार्य मदन गुप्ता सपाटू का कहना है कि इस चाय का प्रयोग हमारा परिवार गत 40 वर्षों से कर रहा है।अतः पूर्णतया बचचों से लेकर किसी भी आयु के लोगों के लिए गुणकारी है।
बस आज से ही आरंभ कर दीजिये इसका नियमित सेवन और रहिए चिर युवा…और सदा संक्रमण मुक्त…….
 

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